homeopathic medicine for conjunctivitis

आँख आना (Conjunctivitis)

आँख बहुत ही कोमल और जटिल अंग है , यह एक कैमरे की तरह होता है जो की हर बाहरी चीज का फोटो बनाकर दिमाग तक भेजता है हमलोग जो बाहर से देखते हैं वास्तव में आंख उस आकार का नहीं है , वह एक गोल पत्थर की तरह गोल है | अंडे की खोल की तरह सफेद भाग जिसका कुछ हिस्सा हमलोग देख पते हैं उसे  श्वेत पटल (Sclera) कहते हैं यह परत एक मोटे कागज की तरह कड़ा ,घना और अस्वच्छ होता है | आंख की पुतली 3 परतों से ढंकी रहती  है श्वेत पटल इसका पहला परत  है , श्वेत परत (sclerotic layer) के ठीक नीचे दूसरा परत होता है जिसका नाम choroid coat (कोरोइड) है  जिसका hindi नाम रक्तक या कृष्ण -पटल है – यह आंख के भीतर की ओर Sclera के साथ लगा रहता है और इसमें एक तरह काले रंग का पदार्थ भरा हुआ रहता है | choroid को हमलोग बाहर से नहीं देख सकते | काले रंग का जो भाग हम देख पाते हैं उसे iris (आईरिस) कहते हैं , आईरिस के ठीक बीच में छोटा गोलाकार छेद होता है जिसको प्यूपिल (pupil) कहा जाता है, हिंदी में पुतली  , प्यूपिल  ठीक दर्पण की तरह होता है जब इसके सामने कोई चीज आती है तो उसकी छाया बनाती है, प्यूपिल अँधेरे में फैलता है और रौशनी में सिकुड़ जाता  है | pupil और iris के ऊपर एक स्वच्छ पर्दे की तरह परत होता हो जो कॉर्निया कहलाता है इसे स्वच्छ मंडल भी कहते हैं |

रेटिना – यह आंख के अंदर तीसरा परत है जो की आँख के भीतर नीचे की ओर choroid के साथ सटा हुआ रहता है इसमें पतली झिल्ली होती है|

 

आँख का प्रदाह (Conjunctivitis)

आँख की पलक के अंतिम हिस्से से शुरू होकर पलक के भीतर की ओर का पुरा स्थान ढंके हुए जो एक बहुत पतला स्वच्छ पर्दा (Mucous membrane) नेत्र गोलक के सामने के हिस्से में पुरे श्वेत पटल के ऊपर है जिसका नाम conjunctiva (कान्जंकटाइवा ) है , जब इसमें प्रदाह होता है तो उसे बोल चाल की भाषा में आँख आना , अंग्रेजी में Conjunctivitis या ophthalmia कहा जाता है |

इसके 5 प्रकार हैं

  1. Catarrhal (कैटरल) – सर्दी या ठण्ड लगने के कारण

  2. Purulent (पुरुलेन्ट) – पीब का स्राव होने वाला

  3. Granular (ग्रैन्युलर) – दानों वाला

  4. Phlyctenular (फ्लाईक्टेन्युलर) – छोटी छोटी फुन्सियों वाली

इन सब बीमारियाँ अलग प्रकार के होने के बावजूद प्रायः पहली प्रकार से ही शुरू होता है , पहले रक्ताधिक्य होकर या congestion होकर बाद में सर्दी जनित प्रदाह होता है , उसके बाद पुरुलेन्ट आदि प्रकार में बदल जाता है | प्रदाह कॉर्निया में फैलकर कॉर्निया संक्रमित हो जाता है और आँख की पलकें फूल जाती है , आँखे लाल रंग की हो जाती है और बहुत दर्द  होता है ,  आँखें गर्म होती है , फुल जाती है , करकराती है | कभी कभी कान्जंकटाइवा इतना फुल जाता है की कॉर्निया कयूपरा जाता है   इस स्थिति को chemosis (किमोसिस ) कहते हैं |

रोग का कारण

ठण्ड लगना , आँख में चोट लगना , चर्म रोग से संक्रमण आँख तक फ़ैल जाना, रोग से  संक्रमित आदमी के सामान इस्तेमाल करने पर या किसी अन्य कारणों से |

Catarrhal conjunctivitis (सर्दी या ठण्ड से होने वाले आँख का प्रदाह )

यह बीमारी उतना अधिक खतरनाक नही है , बिना कोई विशेष ईलाज के ही अगर सावधानी रखा जाय तो बीमारी ठीक हो जाती है | अगर आँख म  कुछ गिर जाय तो उसे निकल जाने पर ठीक हो जाती है , अगर आँख में कोई हानिकारक तरल या कोई पदार्थ गिर जाय तो साफ़ पानी से आंख को धोकर 1-2 बूंद शहद डालनी चाहिए | आँख हमेशा साफ़ रखनी चाहिए | इस रोग से ग्रसित आदमी के सामन इस्तेमाल करने से बीमारी फैलने की सम्भावना रहती है |

 

लक्षण

पहले आँख के अन्दर बालू , धुल गिरने के जैसा अनुभव होता है और किरकिराता है, फिर आँखों में बहुत जलन और खुजली होती है , बहुत पानी गिरता है , आँखे चिपकती है , पलके जुड़ जाती हैं , लगातार आँख में पीब और कीचड़ जमा होता रहता  है , रौशनी सहन नही होती है , हल्का बुखार भी रह सकता है |

 

ईलाज 

दवाइयां

एकोनाईट 30 – रोग शुरू होने के साथ ही इसे लेना चाहिए , हर 2 घंटे पर 1 खुराक

बेलाडोना 30 – दिन में 3-4 बार – रोग की हालत थोड़ी बढ़ जाने की अवस्था में , आँख बहुत लाल , दर्द , सिर दर्द , रौशनी सहन न होना |

यूफ्रेसिया 30 दिन में 3-4 बार – आँख में जलन और आँखे गड़ना, किरकिरिना, लगातार पानी गिरना , आँखों में कीचड़ , आँखों में घाव

अर्जेन्टम नाइट्रिकम 30 या 200 दिन में 3 बार – आँख आकर पीब की तरह कीचड़ निकलना और प्रदाह का घाव में बदलना , पीब और कीचड़ का रंग पीले रंग का , रात को आँखें जुट जाती है |

मर्क सोल 30 या 200 दिन में 3 बार  – रात को तकलीफ बढ़ जाना , आँख से अधिक मात्रा में पीब निकलना और साथ में युफ्रेसिया के लक्षणों में

एपिस मेल 30 या 200 दिन में 3 बार  – अगर पलकें बहुत फुल गयी हो , भीतरी भाग लाल गुलाबी , साथ में जलन , दर्द , पानी गिरना

रस टक्स 30 – जब रोग ठंड लगने के कारण हुई हो , दर्द अधिक हो और पीब का मात्रा कम हो , पलकें फूली हुई

हिपर सल्फर 30 या 200 – जब रोग पुराना हो जाय , तकलीफ कम , गाढ़ी पीब खूब निकलना  , ठंड सहन नहीं होना

आर्सेनिक 30 य 200 – आँखें लाल , पलकों में घाव , सर्दी होना , नाक और आँख से गर्म पानी निकलना

 

सड़नशील कन्जंकटिवाइटिस ( Purulent conjunctivitis)

इस रोगका दूसरा नाम है–इजिप्सियन अप्थैल्मिया । किसी प्रकार की विषाक्त वस्तु शरीर के अन्दर प्रवेश कर अथवा आँखमें लगकर यह रोग उत्पन्न होता है, इसके अलावा यह स्पर्शाक्रामक रोग है; रोगग्रस्त व्यक्ति के साथ में रहने से स्वस्थ व्यक्ति भी इस रोग से रोगग्रस्त हो सकता है । प्रमेह या उपदंशके विष से भी यह रोग हो सकता है । गनोरियल अप्थैल्मिया या प्रमेहजनित आँखके प्रदाह के साथ इसका कोई खास अंतर नही है, लेकिन इसमें रोग बहुत जल्दी बढ़ जाता  है । हॉस्पीटल, सेना-निवास, स्कूल, कॉलेज इत्यादि स्थानों में जहाँ पर लोगों की संख्या अधिक रहती है वहीं पर इस रोग का अधिक संक्रमण होता है, इसलिये उन सब स्थानों में बीमारी फैलने पर बड़ी सावधानी से रहने और किसी को यह होने पर उसे बड़े अच्छे से आँख साफ रखना पड़ता है, नहीं तो रोग बढ़कर आँखें नष्ट हो सकती हैं । इस जाति की बीमारी पुराना रूप धारण करती है और सावधान न होने से क्रमशः कॉर्निया संक्रमित होकर आँखें नष्ट हो सकती हैं, बहुत बार रोगी अन्धा हो जाता है । सर्दी से होनेवाले रोग से भी कभी-कभी यह रोग होता है ।

इसके लक्षण पहले आँख से श्लेष्मा निकलता है व क्रमशः वह पीव में परिणत होता है, वह पीब इतनी जल्दी जल्दी उत्पन्न होती है और बढ़ जाती है कि किसी तरह कंट्रोल होने की स्थिति में नही रहती

 

चिकित्सा

इस रोगकी–मर्क कोर 30 मुख्य दवा है । हिपर सल्फर 30, कैल्केरिया सल्फ 6X भी बहुत अच्छी दवा है ।

 

Granular conjunctivitis (दानामय )

इस रोग में आँख के पलकों के भीतर बहुत सारी छोटी – छोटी फुन्सियां या दाने हो जाती हैं , पहले आँखें फूलती हैं , रोशनी सहन नहीं होती है , आँखों से जल की तरह पतली पीब निकलती है , कुटकुटाता है , पलकें फुल जाती है , पलकों के भीतरी हिस्से में खुरखुरापन हो जाती है जिससे कॉर्निया भी खुरखुरा और अस्वच्छ हो जाता है , इससे आँखे नष्ट होने का खतरा होता है | कई बार पलकें भीतर की ओर सिकुड़ जाती है जिसे एन्ट्रोपियन (Entropion ) कहते हैं |

 

कारण

किसी प्रकार की conjuntivitis की अवस्था या संक्रमण आदि अच्छा से ठीक न हुआ हो तो यह पुराना होकर Granular conjunctivitis हो जाता है | हमेशा धुप, धुल आदि में रहने से भी यह रोग हो सकता है | इस रोग में बहुत कष्ट होता है |

 

ईलाज

आँखों में बाहरी प्रयोग करने के लिए युफ्रेसिया Q पानी में मिलाकर या युफ्रेसिया eye drop प्रयोग करना चाहिए , साथ में  युफ्रेसिया 30 और अर्जेन्टम नाइट्रिकम 30 2 – 2 घंटा पर या दिन में 3 बार खाएं|

पल्साटिला 30 या 200 – रात को अधिक कीचड़ जमता है , तुरत तुरत आँख चिपकती है , पलको में छोटी छोटी फुन्सियां

हिपर सल्फर 30 और बेलाडोना 30 – आँखों के चारो तरफ घाव , फुन्सियां , आँख में पीब , बहुत ज्यादा तकलीफ, अत्यधिक दर्द , रोशनी सहन नही होना

 

 

source- practitionars guide by Dr NC ghosh MD

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डा राजकुमार (BHMS) होमियोपैथी के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित और काफी अनुभवी डॉक्टर हैं , अपने क्लिनिक के माध्यम से कई वर्षों (लगभग 20 वर्ष) से हर तरह की नये और पुराने तथा जटिल रोंगों के सफल ईलाज करते आ रहे हैं ,यह वेबसाइट किसी भी व्यक्ति के लिए काफी उपयोगी है , कोई भी आदमी इस वेबसाइट से फायदा उठा सकते हैं | अगर कोई भी सवाल या कुछ पूछना चाहते हैं तो बिना कोई संकोच के सम्पर्क कर सकते हैं , email - [email protected]

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