anemia treatment

एनीमिया Anemia के लक्षण , कारण और ईलाज

एनीमिया. anaemia क्या है

एनीमिया (Anemia), जिसे हिंदी में रक्ताल्पता या रक्त की कमी या खून की कमी कहते हैं और जैसा की नाम से ही जाहिर है की यह रक्त से सम्बंधित बीमारी है | एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति के खून का वह स्तर कायम नहीं रह पाता , जो साधारणतया होना चाहिए | खून में लाल कणों अथवा हेमोग्लोबिन (Hemoglobin) मात्रा और गुणों से काफी कम हो जाते हैं |

रक्त एक तरल पदार्थ है , इसमें कुछ ठोस पदार्थ भी शामिल रहता है | तरल पदार्थ को प्लाज्मा (Plasma) कहते हैं इसका रंग हल्का पीला होता है | ठोस पदार्थ रक्तकण होता है | रक्तकण दो तरह के होते हैं – सफ़ेद और लाल | इन्ही लाल रक्तकणों के कारण रक्त का रंग लाल दिखाई देता है | प्रत्येक लाल कण में हेमोग्लोबिन रहता है और पूरी तरह एक झिल्लीनुमा पदार्थ से ढंका रहता है , जिसे स्ट्रोमा (Stroma) कहते हैं | हेमोग्लोबिन में जिसका रंग लाल होता है , पर्याप्त मात्रा में लोहा होता है | हेमोग्लोबिन का काम साँस द्वारा खींची गयी हवा में से आक्सीजन को चूस लेना और समस्त शरीर में पहुचाना है | हेमोग्लोबिन जब आक्सीजनके सम्पर्क में आता है तब उसका रंग चमकदार लाल हो जाता है अन्यथा आभाहीन लाल रहता है | रक्त का रंग लाल होने का कारण रक्तकणों में हेमोग्लोबिन का होना है |

शरीर की हड्डीयों के अंदर जो पदार्थ भरा होता है उसे अस्थिमज्जा (Bone marrow) खा जाता है | लाल रक्तकणों का निर्माण इन्ही अस्थिमज्जा में होता है | अगर कभी किसी करणवश लाल रक्तकणों का उचित मात्रा में निर्माण नहीं होता है या वे नष्ट होने लगते हैं तो रक्त अपना स्वाभाविक लाल रंग खो देता है , ऐसी अवस्था में रोगी पीला नजर आने लगता है , यही एनीमिया है |

 

वह कौन सी चीज है जो रक्त के निर्माण में बाधा पहुँचाती है ?

गैस्ट्रिक जूस (पेट में उत्पन्न हुए एक तरह का रस ) में एक चीज का होना पाया गया है जिसे इन्त्रिन्जिक (Intrinsic factor) कहते हैं | इसी तरह हमारे भोजन में  Extrinsic factor का होना पाया गया है | खाना पेट में जाने के बाद extrinsic factor गैस्ट्रिक जूस के intrinsic  factor के साथ घुल जाता है और एंटी एनिमिक पदार्थों का निर्माण करता है | यह पदार्थ अंतड़ियों द्वारा चूसा जाता है और रक्त में मिलकर यकृत (Liver) में जाकर इकठ्ठा  होता रहता है | जब अस्थिमज्जा को लाल रक्त कोषों के निर्माण और उनमें परिपक्वता लाने की आवश्यकता होती है तब यह एंटीनिमिक पदार्थ रक्त प्रवाह द्वारा यकृत से वहां पहुँचता है और इस प्रकार साधारण लाल रक्त कोषों से परिपक्वता आती है और वे बढ़ते हैं | अगर इस एंटी एनीमिक पदार्थ का निर्माण नहीं हो पाता या वह अस्थिमज्जा तक नहीं पहुँच पाता , उस स्थिति में स्वस्थ और पुष्ट रक्त कोषों का निर्माण नहीं हो पाता और परिणाम स्वरुप घातक (Pernicious Anaemia) होता है |

क्यों एंटी एनीमिक पदार्थ लाल रक्त कोषोंके निर्माण के लिए अस्थिमज्जा द्वारा चाहने पर भी वहां तक पहुँच नहीं पाते  ?

इसके कारण इस प्रकार हैं -भुखमरी की हालत में या जब उचित प्रकार का भरपूर भोजन न मिले तो Extrinsic factor की कमी रहेगी |

  1. इसी प्रकार अगर पेट में Intrinsic Factor, जिसका दूसरा नाम हेमोपायटिन (Haemopoitin) है , कम मात्र में उत्पन्न हो रहा हो तब भी एंटी एनीमिक पदार्थ कम मात्रा में तैयार होगा  |
  2. यदि ये दोनों factor  पर्याप्त मात्रा में बन रहे हों, तो भी यह हो सकता है की अंतडियो में किसी दोष के कारण जैसे की किटानुओं की उपस्थिति में ये आपस में घुल-मिल न सकें |
  3. अगर ये आपस में घुल-मिल भी जाते हैं, फिर भी यह हो सकता है की अंतड़ियां उन्हें चूसकर यकृत तक न पहुंचा सके , जब दस्त लगने लगते हैं , तब ऐसा ही होता है | सारा एंटी एनीमिक पदार्थ मॉल के साथ बाहर फेका जा सकता है और इस प्रकार अंतड़ियां अपना साधारण कार्य नही कर पाती |
  4. यदि यह पदार्थ यकृत में पहुच भी गया हो तो हो सकता है की यकृत अपने किसी दोष के कारण स्वयं इतना असमर्थ हो की उन्हें ठीक तरह से जमा करके न रख सके |

 

क्या इसके अलावे भी एनीमिया होने के कोई और कारण हो सकते हैं ?

हा , एनीमिया शरीर में किसी भी कारण से रक्त की हानि या रक्तश्राव से हो सकता है | रक्तश्राव का कारण कोई गहरी चोट हो सकती है | मलद्वार , मूत्रद्वार, नाक फेफड़े या शरीर के किसी हिस्से से किसी बिमारी के कारण रक्तश्राव की प्रवृति हो सकती है | यह एक बिमारी है | इस बिमारी का नाम हेमोफिलिया (Haemophilia) है .

एनीमियाका कारण लाल रक्त कणों का असाधारण रूप से नाश होना भी है जैसे- मलेरिया के कीटाणु लाल रक्त कणों पर ही जीवित रहते हैं इसलिए मलेरिया से कुछ समय तक पीड़ित रहने पर शरीर पीला और रक्तहीन पड़ जाता है | गर्भावस्था भी महिलाओं में अनेक प्रकार के रोग एनीमिया का कारण होती है |

Types of Anaemia

  1. Primery Anaemia

  2. Secondary Anaemia

Primery Anaemia -इसके अंतर्गत क्लोरोसिस Clorsis( हरित्पांडू ) और पर्निशस (Pernicious) एनीमिया हैं

पर्निशस एनीमिया ( Pernicious Anemia ) के क्या लक्षण है?

पर्निशस एनीमिया एक घातक रोग है 

  • रोगी का चेहरा रोग के शुरू से ही फीका रहता है , या चेहरा थुलथुला हो जाता है 
  • पेट में अम्ल रस की उत्पति न होने से भूख कम हो जाती है या तो पेट में हवा भारी मालूम पड़ती है या दस्त ही लगते रहते है। जीभ में भी प्रदाह आ जाता है और मुख में पीड़ा भी हो सकती है। निम्न कोटि का रक्त शरीर के प्रत्येक अंग को निर्बल कर देता है। रोगी का चेहरा पीला और रक्तहीन नजर आता है। कुछ समय पश्चात सांस की बीमारी भी हो सकती है अर्थात जरा सा परिश्रम करने पर दम फूलने लगे, पैरों में सूजन भी चढ़ जाती है। इस बीमारी का प्रभाव स्नायुओं पर भी बहुत गहरा होता है। जिसका परिणाम यह होता है कि हाथ-पैर की अंगुलियों में झुनझुनी मालूम पड़ती है और वे सुन्न पड़ने लगती है। रोगी को चलने फिरने में कठिनाई मालूम पड़ती है। यदि रोगी का रक्त किसी पैथालाजिस्ट के पास जाँच के लिए भेजा जाये तो मालूम पड़ेगा कि लाल रक्तकणों की संख्या प्रति घन मिलिमीटर (C.M.M) घटकर 4 या 5 लाख रह गयी है, जबकि स्वस्थ हालत में यही इस संख्या से दस गुना अधिक अर्थात 50 लाख प्रति घन मिलीमीटर होना चाहिये। उससे यह भी मालूम पड़ेगा कि लाल रक्त कण आकार में भी छिन्न-भिन्न हो गये है।
  • मानसिक दुर्बलता भी आ सकती है , नाक, मसूढ़े से रक्तस्राव हो सकता है 
  • सेकेंडरी अनिमिया में सारे लक्षण इसमें भी हो सकते हैं |

 

लाल रक्त कणों का 70 प्रतिशत भाग पानी रहता है। ये रक्तकण हेमोग्लोबिन और स्ट्रोमा (Stroma) के बने रहते है। स्ट्रोमाएंटीएनीमिक पदार्थों का बना होता है और इसे एक ऐसा ढांचा समझिये, जिसके अन्दर हेमोग्लोबिन सुरक्षित रहता है। हेमोग्लोबिन एक प्रोटीन मिश्रण है और लोहा उसमें एक प्रमुख तत्व है। लोहे की आवश्यकता हेमोग्लोबिन के निर्माण के लिए पड़ती है। रक्त स्राव के कारण जब रक्त में हेमोग्लोबिन का प्रतिशत कम हो जाता है तब यही लोहा नये हेमोग्लोबिन का निर्माण करके उनकी पूर्ति करता है। रक्त में लोहे की कमी एनीमिया का कारण बन जाती है। इसे आयरन (Iron Deficiency Anaemia) कहते हैं |यदि आपका मरीज एनीमिया से पीड़ित है और विगत इतिहास में किसी प्रकार के रक्तस्राव का होना इंगीत करता है- बवासीर से या मासिक धर्म से, प्रसव के समय या गर्भावस्था में, नाक, गला, फेफड़ा, आंते, मलद्वार या शरीर के किसी भी भाग से यदि रक्त स्राव होता रहा हो तो इस निष्कर्ष पर पहुंचना सही है कि मरीज को आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया है।

नवयौवन प्राप्त लड़कियों को भी इस प्रकार का एनीमिया हो जाता है, जिसे हरित पाँडु या क्लोरोसिस कहते है। इसमें शरीर कुछ-कुछ हरे रंग का नजर आता है। इसमें लड़कियों की पाचन शक्ति अस्त-व्यस्त हो जाती है। कमजोरी आने लगती है, मासिक धर्म अनियमित और पीड़ा के साथ होता है। कभी-कभी होता भी नही। उत्तम स्वास्थ्य वनाये रखने के लिए हम अपने दैनिक भोजन के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 12 मि०ग्रा० लोहा लेते है। लगभग 1 मिoग्रा० लोहा प्रतिदिन हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है। यदि भोजन उत्तम प्रकार का और स्वास्थ्यवर्द्धक न हो, जिससे 12 मि०ग्रा० लोहे की पूर्ति हो सके तो एक समय ऐसा आ जाता है, जव शरीर में लोहे की कमी हो जाती है, जिसका परिणाम आयरन डिफीशिएंसी एनीमिया होता है। कभी-कभी अस्थिमज्जा लाल रक्त कोषों का निर्माण बिल्कुल ही बन्द कर देती है, इसे एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia) कहते है। यह असाध्य है और ठीक नही होता। चिकित्सा चाहे जिस विधि से की जाये, सबसे अधिक ध्यान रोगी के संतुलित व उत्तम आहार की ओर देना चाहिये। रहने का स्थान स्वच्छ व हवादार हो।

 

Secondary Anaemia-

इसको गौण रक्तहीनता कहते हैं – इसके मुख्य कारण रक्तस्राव (Haemorrhage, Bleeding ) जैसे चोट आदि लगने के कारण , टाईफ़ॉईड (Typhoid) ज्वर  होने के कारण ,प्रसव के पहले और बाद में bleeding, बबासीर के कारण , अनसन (Starvation) , मलेरिया होने के बाद , सिफलिस के कारण , हेमोफिलिया के कारण आदि से जो खून की कमी होती है उसे secondary Anaemia कहते हैं |

Secondary Anemia के लक्षण-

  • मुह और जीभ सफेद
  • आँखे धंसी हुई
  • हाथ और पैर के नाख़ून सफ़ेद
  • भूख नही लगना , कब्ज
  • तेज धडकन , थोड़े शारीरिक मेहनत से हांफने लगना सांस में दिक्कत हाथ पैर फूलना (सुबह कम और दोपहर बाद अधिक )
  • हाथ पैर में जलन , सिर में चक्कर 
  • हल्का बुखार रहना 

 

Homoeopathic Medicine

फेरम मेट(Ferrum met) 3x या  6 – अनीमिया की यह उत्तम औषधि है ,शरीर में खून की कमी के कारण बहुत ज्यादा कमजोरी ,चेहरा कभी लाल कभी पीला , थोड़ी सी मेहनत से बोलने से हांफने लगना, चेहरा फीका , बेचैनी में रोगी टहलना पसंद करता है

कल्केरिया फॉस (Calcaria phos) 6x या  12x 4-4 गोली दिन में 4 बार – पौष्टिक खाद्य पदार्थों के अभाव से उत्पन्न हुए अनीमिया के लिए उत्तम , हाथ पाव ठन्डे , सर चकराना ,जुबान सफेद और बेस्वाद , किसी रोग से ग्रसित होने के बाद ठीक होने पर अगर शारीरिक कमजोरी आ गयी हो और खून की कमी हो गयी हो

फेरम फॉस (Ferrum phos) 6x या 12x 4-4 गोली दिन में 4 बार – कल्केरिया फॉस के बाद इसका इस्तेमाल करने से लाल रक्त कणों का निर्माण तेजी से होता है

चाइना China) Q या 30 दिन में 3-4 बार – शरीर का रक्त , वीर्य आदि नष्ट हो जाने के बाद रक्त की कमी और बहुत कमजोरी

कार्बो वेज (Carbo veg) 30 दिन में 3-4 बार -ऐसा लगे जैसा शरीर में जान ही नही है, अचेत और बेहोशी की हालत , शरीर (हाथ, घुटने और पैर )काफी ठंडा पड़ जाना

पल्साटिला (Pulsatilla)30 या 200 दिन में 3 बार  – महिलाओं और लडकियों में मासिक धर्म की गड़बड़ी या देरी ,के साथ खून की कमी,  शरीर में जलन, रोगी को भीतर से बहुत ठण्ड लगती है फिर भी खुली हवा में अच्छा लगता है

एसिड फॉस (Acid phos) 30 दिन में 3 बार – रति क्रिया (sexual activity)की अधिकता के कारण खून की कमी और कमजोरी

नेट्रम म्यूर (Natrum mur ) 30 दिन में 3 बार – बहुत दिन तक मलेरिया रोग से ग्रसित रहने के बाद एनीमिया , दुबलापन , त्वचा रुखा सुखा साथ ही नमक खाने की इच्छा अधिक

कैल्केरिया कार्ब (Calcaria carb )30 या 200  – दिन में 3 बार – जिन व्यक्तियों का रंग होरा होता  है , बाहर से खुब मोटे ताजे लेकिन आन्दर से कमजोर होते हैं , थोड़ा सा परिश्रम करने से ही पसीना आ जाना , अंडे, खड़िया (chalk) खाने की इच्छा , अम्ल की शिकायत , खट्टी डकारें  

ग्रेफाइटिस (Graphites) 30 या 200 दिन में 3 बार – जो महिलायें बाहर से देखने में मोटी ताज़ी , गोल मटोल थुलथुली लगती है लेकिन भीतर से कमजोर और रक्तहीन , अक्सर कब्ज, चर्म रोग और सर्दी खांसी का शिकायत रहता है , जिनका मासिक धर्म देर से या बहुत कम होता है 

 

आहार – Diet

  • एनीमिया में हरी साग सब्जियां व फलों का रस पर्याप्त मात्रा में दिया जाना चाहिये। अंगूर, सेब, टमाटर आदि से एनीमिया शीघ्र दूर भागता है। प्राकृतिक रूप में ये विटामिनो व अन्य तत्वों से भरपूर है।
  • सहजन की पत्तियों की सब्जी खाना फायदेमंद है , इससे खून की कमी दूर होती है
  • गाजर, पालक और टमाटर अधिक खाएं , गाजर का रस भी काफी फादेमंद है खून की कमी को दूर करने के लिए
  • अनार , चुकन्दर का जूस लें
  • पौष्टिक खाना खाएं
  • प्रतिदिन पपीता खाने से भी खून की कमी दूर होती है
  • इस हालत में विश्राम बहुत आवश्यक है। संतरे का रस लेना लाभदायक है। सप्ताह में 2 बार विटामिन B भी साथ में लेना आवश्यक है। गर्भवती महिलाये को फोलिक एसिड  लेना है।

 

 

Reference

Homeo gagan, Practitioners guide(Dr NC Ghosh), Materia media

About the Author

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डा राजकुमार (BHMS) होमियोपैथी के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित और काफी अनुभवी डॉक्टर हैं , अपने क्लिनिक के माध्यम से कई वर्षों (लगभग 20 वर्ष) से हर तरह की नये और पुराने तथा जटिल रोंगों के सफल ईलाज करते आ रहे हैं ,यह वेबसाइट किसी भी व्यक्ति के लिए काफी उपयोगी है , कोई भी आदमी इस वेबसाइट से फायदा उठा सकते हैं | अगर कोई भी सवाल या कुछ पूछना चाहते हैं तो बिना कोई संकोच के सम्पर्क कर सकते हैं , email - [email protected]

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