मूत्रतंत्र के कुछ प्रमुख रोग Urine problem

Urine problem

Painful urination treatment

Frequent urination

Hematuria

Retention

Cystitis

etc

 

मूत्रतंत्र

गुर्दे (kidney), मूत्र वाहिनियाँ (Urinary duct), मूत्राशय (bladder) तथा मूत्र मार्ग (Urinary tract)से मिलकर मूत्रतंत्र बनता है। गुर्दे की संख्या दो है, जब ये खून को छानते हैं तो मूत्र बनता है, ये कमर के ठीक ऊपर मेरु रज्जु के दोनों किनारों पर स्थित होते हैं। मूत्र वाहिनी प्रत्येक गुर्दे से मूत्राशय में पेशाब ले जाने वाली एक पतली नली है। निचले उदर में स्थित मूत्राशय एक तरह से मूत्र को जमा करने वाला भंडार का काम करता है, जहाँ से समय समय पर पेशाब मूत्रमार्ग के रास्ते से बहकर बाहर आता है। कभी कभी मूत्राशय की सूजन तथा प्रोस्टेट की सूजन हो जाती है, लेकिन दोनों में अंतर यह है की मूत्राशय की सूजन में दर्द कमर से उठकर कमर तक जाता है लेकिन प्रोस्टेट की सूजन में दर्द कमर से चलकर मूत्राशय तक नीचे जाता है। मूत्राशय में और भी अनेक रोग हो सकते हैं जैसे – मूत्रमार्ग में जलन (urethritis), पेशाब करते समय दर्द (painful urination), मूत्र में रुकावट (retention  of urine), बहुमूत्र (Diabetes), मूत्रपथरी , मूत्रनली का सिकुड़ना आदि।
– गुर्दा, मूत्राशय तथा मूत्ररोग में बहुत सारी दवाइयाँ प्रयोग की जाती हैं लेकिन जो दवाइयाँ काफी कारगर साबित होते हैं उनके नाम लक्षण के अनुसार दिए गए हैं।

– नवजात बच्चे का पेशाब रुक जाना – एकोनाइट 30
– लड़कों का पेशाब अपने आप निकल जाना (frequent urination in men) – कॉस्टिकम 30
– लड़कियों का पेशाब अपने आप निकल जाना – सीपिया 30
– खांसते या छींकते समय पेशाब निकल जाना – कॉस्टिकम 30
– पेशाब का अचानक रुक जाना – एकोनाइट,  जेल्सीमियम 30
– ठण्ड लगने के कारण पेशाब रुक जाना – एकोनाइट 30
– पेशाब से बहुत खराब गंध आना – बेन्जोइक एसिड 6, 30
– मूत्र में मीठा सा गंध – टेरिबिन्थ 30
– पेशाब से घोड़े के पेशाब जैसा गंध आना – नाइट्रिक  एसिड 30
– मूत्र में बी कोलाई – सीपिया 30, थूजा 200, 1M
– मूत्रनली में जलन – कैन्थरिस 30
– पेशाब के साथ खून आना – हैमामेलिस Q, 30, कैन्थरिस 30
– मूत्र में मवाद – बर्बेरिस वल्गैरिस Q, कैनाबिस सैटाइवा Q, 30, हाइड्रैन्जिया 30
– गुर्दे में पथरी – बर्बेरिस वल्गैरिस Q, 30, लाइकोपोडियम 30
– कमर में काटने जैसा दर्द जो कभी कभी अचानक भी उठ सकता है, दर्द शुरू होने के बाद आस पास फैलना, पेशाब करते समय दर्द का बढ़ना – बल्बेरिस वल्गेरिस Q

 

पेशाब में एल्ब्यूमेन आना Albuminuria

(Albumen in urine)

  • टेरिबिन्थ 30 – पहली अवस्था में, पेशाब की तली में खून मिला हो या कीचड़ की तरह गंदला पेशाब होता हो या केवल खून का पेशाब हो साथ में पेट फूलना, कमजोरी, सांस में दिक्क़त आदि
  • ईओ नाईमिन 30 – बून्द बून्द थोड़ा थोड़ा पेशाब, पेशाब में एल्ब्यूमेन, एपिथेलियल कास्टस, सांस में कष्ट, बुखार तथा गर्भावस्था में महिला को पेशाब में एल्ब्यूमेन आना।
  • कैली क्लोर 30 – पेशाब में एल्ब्यूमेन का मात्रा अधिक होना, पेशाब बहुत कम होना या बिल्कुल न होना, गर्भावस्था में ज्यादा फायदा करती है।
  • सर्सापैरीला 30 – पेशाब करने के पहले या करते समय नहीं -ठीक पेशाब करने के बाद बहुत तेज जलन और दर्द होना, पथरी का दर्द में, बच्चा पेशाब करते समय रोता है, यह पथरी की भी एक बढ़िया दवा है।
  • लाइकोपोडियम 30, 200-

 

पेशाब रुक जाना या मूत्ररोध (retention)

Retention meaning

किसी विशेष कारण से अगर किडनी में पेशाब सिक्रिशन न हो मतलब किडनी में पेशाब उत्पन्न न हो तो उसे suppression of urine कहते हैं लेकिन अगर किडनी से स्वभाविक सिक्रिशन हो और पेशाब ब्लैडर (मूत्राशय ) में आकर जमा रहे और किसी कारण से मूत्राशय उसे बाहर निकल न सके तब उसे मुत्र्रोध या retention of urine कहा जाता है। पेशाब जमा होने के कारण तलपेट फूल जाता है और मूत्र के विष खून में जाकर पुरे शरीर में फैल जाते हैं, जिसके कारण दीमाग भी प्रभावित हो जाते हैं। मूत्ररोध में पेशाब बहुत कम हो जाता है बंद हो जाता है, चेहरा फूल जाता है तथा दीमाग या ह्रदय पर रोग का आक्रमण हो जाता है मूत्ररोध से होनेवाले परेशानी किसी में धीरे धीरे या किसी में अचानक प्रकट होते हैं।

कारण

मुत्रकोष की कोई पुराणी बीमारी होने पर 

मूत्र तंत्र क कोई ऑपरेशन होने पर 

मूत्र यंत्र में किसी प्रकार का चोट या शॉक लग जाने के कारण 

कॉलरा में अत्यधिक उलटी, दस्त हो जाने के कारण 

मूत्रनली के अन्दर संकुचन हो जाने या त्य्मर हो जाने या बड़ी बड़ी पथरी रहने पर मूत्राशय के भीतर पेशाब रहते हुए नहीं निकल सकता है और रुका रहता है, कॉलरा रोगों में भी बहुत बार यह बीमारी होती है।

प्रमुख लक्षण इस प्रकार होते हैं जैसे –

मूत्राशय फुल जाता और भरी महसुस होता है, बार बार पेशाब का वेग आता है लेकिन बहुत कोशिस करने भी पेशाब नही होता है, कभी कभी काफी देर तक बंद रहकर बूंद  बूंद निकलता है। 

मूत्राशय में दर्द और फट जाने जैसा तकलीफ 

पेशाब की कमी
शोथ
मितली
आक्षेप
बेहोशी
चेहरे का मोम जैसा मलिन होना

चिकित्सा (Homoeopathic treatment)

  • शिशु के जन्म लेते ही मूत्ररोध हो जाये तो इस दवा का प्रयोग किया जाना चाहिए –एकोनाइट 30, 200
  • पेशाब रुक जाने पर अगर मूत्राशय ग्रंथि फूल जाय तो –लाइकोपोडियम 30, 200
  • हिस्टीरिया के कारण अगर अगर मूत्ररोध हुआ हो – इग्नेशिया 200
  • सोलिडगो Q – जब किसी रोगी का पेशाब रुक जाता है तो कैथेटर लगाकर पेशाब करवाया जाता है। इस दवा के प्रयोग से बिना कैथेटर के पेशाब आने लगता है
  • बुखार, प्यास, मिचली, बार बार पेशाब करने की इच्छा पर पेशाब बून्द बून्द करके हो, हाथ पांव तथा चेहरे का फूल जाना और मस्तिष्क और दिल आदि पर रोग का आक्रमण होना – बेलाडोना 30
  • कैनाविस सैटाइवा Q, 30,200 – जोर के कब्ज के साथ पेशाब तक बंद, पेशाब में जलन, पेशाब की नली में इतना दर्द की छूने और स्पर्श होने के डर से टांग छितराकर चलना।
  • कैन्थरिस 30 – पेशाब कम लेकिन जलन अधिक, बून्द बून्द कर पेशाब होना
  • जब कोई खास लक्षण का पता न चले और दवा का चुनाव करना मुश्किल मालूम पड़े – नेट्रम सल्फ 6X,  सेवाल सेरुलता Q, एक़्विजिटम 30

 

मूत्रकृच्छ्ता (Dysuria)

Burning urination

इस रोग में, रोगी को पेशाब बार बार लगता है लेकिन पेशाब रुक रुककर तथा बहुत तकलीफ के साथ होता है जिससे रोगी काफी परेशान रहता है

  • कैन्थरिस और टेरेबिन्थ 30 या 200– बहुत दर्द (painful urination) तथा कतरने (burning urination)के जैसा महसूस होना, पेशाब में खून के कतरे के जैसा जाना।
  • कोपेवा 30– दर्द के साथ बून्द बून्द पेशाब होना, पीब जैसा सफेद, पेशाब के समय बहुत जलन, बार बार पेशाब लगना आदि लक्षणों में।
  • बोरेक्स 200– अगर बच्चों को मूत्राशय नली का शोथ हो, बच्चा दर्द और जलन के भय से पेशाब करना नहीं चाहता हो।

 

मूत्रनाश (Suppression of Urine)

गुर्दा (किडनी) से अगर पेशाब मूत्राशय में ही न आये या मूत्र बनता ही नहीं हो तो उसे मूत्र नाश (suppression of urine) बोला जाता है। इस बीमारी में मूत्ररोध के तरह तलपेट नहीं फूलता है लेकिन सुस्ती, तन्द्रा, बेहोशी , सिर दर्द, चक्कर आदि लक्षण प्रकट हो जाते हैं।

प्रमुख होम्योपैथिक औषधि – (homoeopathic medicine)

  • टेरेबिन्थ 30– यह मूत्र नाश की उत्तम दवा है
  • एकोनाइट 30 – प्रथम अवस्था में जब अचानक सर्दी आदि लगकर पेशाब रुक जाये।
  • ओपियम 30, 200– तंद्रावस्था, बेहोशी के जैसा होना। हिस्टीरिया आदि के कारण अगर बीमारी हुआ हो तो उसमें भी फायदेमंद है।

 

मूत्राशय प्रदाह (Cystitis)

कभी किसी कारण से मूत्राशय के भीतरी श्लैष्मिक झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) में प्रदाह हो जाता है तो उसे मूत्राशय प्रदाह या सिस्टाइटिस या इंफ्लमैशन ऑफ दि ब्लैडर कहते हैँ।

कारण (Cystitis Causes)

प्रमेह या सुजाक का प्रदाह, बहुत ज्यादा मिर्च और तेज, तीखा पदार्थ खाना, सर्दी लग जाना, बाहरी चोट, मूत्राशय में पथरी, कैथेटर डाल कर पेशाब कराने के समय चोट आ जाना तथा कैन्थरिस या कोपेवा आदि उत्तेजक दवाएं ज्यादा दिनों तक सेवन करने से भी यह बीमारी हो जाती है।

लक्षण (Cystitis symptoms)

पहली अवस्थाब्लैडर(मूत्राशय) के पास जोर का दर्द होना या दर्द बाहर से दबाब देने से, चलने फिरने या हिलने डोलने से बढ़ता है। दर्द युरेटर (मूत्रवाही नली) के भीतर ऊपर किडनी या यूरेथ्रा(मूत्रपथ) के भीतर से नीचे की तरफ चला जाता है। ब्लैडर में पेशाब इकठ्ठा होते ही पेशाब की हाजत होती है और बड़े कष्ट से काँख काँखकर बहुत थोड़ी मात्रा में बून्द बून्द पेशाब होता है। पेशाब करते समय रोगी को बहुत तकलीफ होती है। मूत्राशय में जलन होती है, पेशाब लाल होता है, उसके साथ कभी कभी श्लेष्मा और रक्त मिला रहता है। कभी कभी पेशाब बंद हो जाता है। बुखार आता है जो 100 से 102 डिग्री तक होता है। कठिन प्रकार की बीमारी में वमन, ठंडा पसीना, हिचकी, कमजोरी आदि। रोग की दूसरी या तीसरी अवस्था में पेशाब गंदला और पीब मिला होता है।

एक्यूट सिस्टाइटिस (acute cystitis) 

     पेशाब का आपेक्षिक गुरुत्व कम, अधिक म्यूकस, पेशाब का रंग बदल जाना आदि लक्षण प्रकट होते हैँ। योनि के सामने वाले भाग पर दबाव डालने से किसी प्रकार का दर्द नहीं होता लेकिन भीतर छू देने से जोर का दर्द होता है।

क्रॉनिक सिस्टाइटिस (Chronic cystitis)

    पेशाब का आपेक्षिक गुरुत्व कम, क्षार विशिष्ट (alkaline) रहता है, हमेशा पेशाब में बदबू रहती है। पेशाब में पीब, फॉस्फेट, एल्ब्यूमेन एपिथीलियम तथा एक तरह के कीटाणु रहता है।
रोगी क्रमशः कमजोर और दुबला होता जाता है और कमजोरी तथा रक्त विषाक्त होने से मृत्यु हो जाती है।

चिकित्सा 

cystitis treatment

  • मूत्रनली में बहुत ज्यादा जलन, सूजन प्यास, ठंडा पसीना, बेचैनी – आर्सेनिक, एकोनाइट 30, 200
  • मूत्राशय में दवाब मालूम होना और जलन – नक्स वोम 30, 200
  • चोट लगने के कारण बीमारी हो – अर्निका 30,200
  • बहुत कुंथन, जलन, मिचली – कैन्थरिस 30

 

वाएं दिन म३ 3 बार से लेकर प्रति आधा घंटे तक स्थितिके अनुसार प्रयोग की जा सकती है

  • Q – 10 से 20 बूंद थोड़े पानी के साथ
  • 30, 200 -2 से 3 बूंद जीभ पर 
  • 1M – सप्ताह में 1 बार 3-4 बूंद 

About the Author

monsterid

Admin

डा राजकुमार (BHMS) होमियोपैथी के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित और काफी अनुभवी डॉक्टर हैं , अपने क्लिनिक के माध्यम से कई वर्षों (लगभग 20 वर्ष) से हर तरह की नये और पुराने तथा जटिल रोंगों के सफल ईलाज करते आ रहे हैं ,यह वेबसाइट किसी भी व्यक्ति के लिए काफी उपयोगी है , कोई भी आदमी इस वेबसाइट से फायदा उठा सकते हैं | अगर कोई भी सवाल या कुछ पूछना चाहते हैं तो बिना कोई संकोच के सम्पर्क कर सकते हैं , email - [email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!