pimples homoeopathic treatment

कील मुहांसे और चेहरे की अन्य समस्या

सौंदर्य सबंधी परेशानियाँ और उसका होम्योपैथिक ईलाज 

Pimples homeopathic medicine

homeopathic medicine for black spot on face

युवावस्था के शुरुआत में मुहांसो का होना एक आम समस्या है। इससे लगभग सभी को सामना करना पड़ता है। मुहाँसे मुख्य रूप से चेहरे और ललाट पर ही ज्यादा निकलते हैं लेकिन कभी कभी छाती और पीठ पर निकल जाता है। प्रायः लड़कियों में 13-14 वर्ष और लड़को में 15-18 वर्ष की उम्र में इसकी शुरुआत होती है तथा 20 से 25 साल तक यह परेशान करता है।
लड़के और लड़कियाँ जिस उम्र में अपने सौंदर्य को लेकर सबसे अधिक जागरूक होते हैं उसी उम्र में उन्हें  मुँहासे से सबसे अधिक परेशान होना पड़ता है।

मुहांसे क्या हैं what is Acne

त्वचा में बालों की जड़ों से Sebaceous glands पाए जाते हैं जिससे एक तरह का तैलिय पदार्थ Sebum का स्राव होता है और यह त्वचा को चिकनाई प्रदान करती है। Sebaceous gland हथेली, तलवा, आंख की पलक और ऊँगली के आगे आगे के किनारे वाले भाग को छोड़कर पुरे शरीर पर पाए जाते हैं। इस ग्रंथि की संख्या खोपड़ी (scalp), चेहरे, पीठ और छाती की ऊपरी में ज्यादा रहने के कारण ये भाग ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे तो sebaceous ग्रंथियां जन्म से ही आदमी के शरीर में उपस्थित रहते हैं लेकिन इनसे sebum का स्राव प्रायः युवावस्था के प्रारम्भ में एंड्रोजेन (Androgen) और एस्ट्रोजन (Oestrogen) नाम के सेक्स हार्मोन के प्रभाव से शुरू होता है। sebum रोम के छिद्रों के द्वार शरीर से बाहर निकलता है लेकिन किसी कारण से sebum ज्यादा बनने लगता है और रोमछिद्रों के बंद होने के कारण इसका स्राव नहीं हो पाता है तथा सीबम के जमा होने से सेबेसियस ग्रंथियां फूल जाती है और छोटे छोटे दानों के रुप में दिखाई देने लगती है। इसमें संक्रमण पैदा हो जाने के कारण मवाद भी बनने लगता है तथा दर्द भी हो सकता है। समय पर ईलाज न किया जाय और दानों को नाखुनों से छेड़ देने से त्वचा पर काले निशान पड़ जाते हैं और कभी कभी चेचक के दानों की तरह छोटे छोटे गड्ढे भी हो जाते हैं।

 

मुहांसे होने के कारण Acne Causes

 

1. जवानी के शुरुआत में सेक्स हार्मोनों जैसी Androgen और Oestrogen का असंतुलित स्राव (Unbalnaced secretion)
2. गलत खानपान, चिकनाई, मसालेदार, घी तेल वाले चीजें अधिक खाना।
3. महिलाओं में मासिक सम्बंधित गड़बड़ी।
4. मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, अनिद्रा।
5. कब्जियत।
6. एलर्जी
7. त्वचा में किसी तरह का संक्रमण।
8. प्रदुषण।
9. अनुवांशिक कारण।

 

मुहांसो के प्रकार (Types of Acne)

 

1. एक्नी वल्गेरिस या एक्नी सिम्पलेक्स (Acne Vulgaris or acne simplex)-

यह सबसे साधारण प्रकार का मुहांसा है। इसमें सरसों के दाने के जैसा छोटी छोटी फुंसियाँ निकलती है, दबाने पर इसमें से पानी या चिपचिपा पदार्थ निकलता है। ज्यादा बीमारी बढ़ जाने पर इसमें मवाद भर जाती है, अगर ज्यादा छेड़ छाड़ न किया जाय तो थोड़े दिनों में खुद ठीक हो जाती है।

2. एक्नी पंकटेटा ( Acne Punctata ) –

इस तरह की फुंसियों का सिर कड़ा और काला होता है, इसे ब्लैक हेड (Black head) भी कहते हैं। नाख़ून लगाने से इसमें काला दाग पड़ सकता है।

3. एक्नी इन्डुरेटा (Acne indurata )-

इसमें मटर के दाने जितनी बड़ी फुंसी हो सकती है। इसमें sebaceous gland के चारो ओर के हिस्से में सूजन के साथ कड़ापन आ जाता है और देखने में लाल या नीला दीखता है जिससे चेहरा बहुत खराब दिखने लगता है। इसे ठीक होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। कई बार चमड़ा कड़ा और खुरदुरा हो जाता है जिसका ईलाज प्लास्टिक सर्जरी से ही संभव है।

4. एक्नी पॉपुलोसम (Acne Popolosum)-

इस तरह के फुंसियाँ छोटे दाने के जैसा निकलते हैं और जल्द ठीक हो जाता है, प्रायः इसमें मवाद नहीं पड़ते।

5. एक्नी पस्युलोसम (Acne pustulosum)-

इसमें फुंसी में मवाद भर जाता है तथा दर्द भी अधिक रहता है।

 

homeopathic medicine

 

काली ब्रोम 30 और रेडियम ब्रोम 30 – चेहरे पर मुहासों के लिए, काले धब्बे तथा अनावश्यक तिल आदि

सल्फर आयोड 30 – चेहरे का मुहासे और खुजली जो शेविंग करने के कारण बढती हो , बहने वाला एक्जिमा आदि लक्षणों में

कैल्केरिया पिक्रेटा 30 या 200 – मुहासे और आँखों पर गुहेरी होना

एन्टिम क्रुड 30 या 200 – नुकीले कील की तरह गड़ने वाले मुहांसे 

आर्सेनिक आयोड 30 – अगर चेहरे की फुन्सियां किसी तरह नहीं जाती हो

बर्बेरिस एक्वाफोलियम Q – 10 –10 बूंद दिन में 2 या 3 बार – चेहरे की फुन्सियां ख़त्म करती है और चेहरा साफ़ करती है

सल्फर 30 या 200 – खुश्क और खुरदुरी त्वचा, रोगी को नहाने का मन न करे (अन्य दवाओं के साथ बीच- बीच में इसको भी देना चाहिए )

थूजा 200 – मस्सा जो फुलगोबी की तरह हो, शरीर में कही भी अगर इस तरह का मस्से हो

स्टेफिस्गेरिया और नैट्रम म्यूर 30 या 200 – औरतों में आँखों के चारो ओर काले धब्बे जब किसी गहरे आघात या दुःख के कारण हो

फॉस्फोरस 30 या 200 – जब आँखों के चारो ओर काले धब्बे स्नायविक कमजोरी (Nervous weakness ) के कारण हो

चाइना 6 या 30 – जब आँखों के चारो ओर काले धब्बे अत्यधिक खून बहने या कोई स्राव के कारण हो

सीपिया 30 या 200 – चेहरा पीला और साथ में चेहरे और सीने पर पीले या भूरे धब्बे

आर्सेनिक और लैकेसिस 30 या 200 – काले या नीले रंग के धब्बे के लिए

फेरम मेट 30 – खून की कमी के कारण पीलापन

वैरियोलिनम 200, सरासेनिया 200, और थायोसिनामिनम 30 – चेहरे पर चेचक के दाग को ख़त्म करने के लिए

दवाएं आवश्यकतानुसार दिन में 2 से 3 बार तक ली जा सकती है।

हरी साग सब्जियां , दूध, फल, अंकुरित अनाज और सलाद खूब खाएं 

About the Author

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डा राजकुमार (BHMS) होमियोपैथी के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित और काफी अनुभवी डॉक्टर हैं , अपने क्लिनिक के माध्यम से कई वर्षों (लगभग 20 वर्ष) से हर तरह की नये और पुराने तथा जटिल रोंगों के सफल ईलाज करते आ रहे हैं ,यह वेबसाइट किसी भी व्यक्ति के लिए काफी उपयोगी है , कोई भी आदमी इस वेबसाइट से फायदा उठा सकते हैं | अगर कोई भी सवाल या कुछ पूछना चाहते हैं तो बिना कोई संकोच के सम्पर्क कर सकते हैं , email - [email protected]

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