hydrocele homeopathic medicine

अंडकोष में पानी hydrocele

Hydrocele–अंडकोष में जल-संचय कोष-वद्धि)-

अण्डकोषका अंगरेजी नाम टेस्टिकल ( testicle ) है, यह केवल दो ग्लैण्ड है । वीर्य अर्थात् शुक्र उत्पन्न करना ही इसकी मुख्य क्रिया है । लिंग की जड़ से युक्त एक चमड़े  की थैली ( इसका अङ्गरेजी नाम स्क्रोटम है ) के अन्दर ये दोनों ग्लैण्ड रहते हैं, किन्तु उस थैलीके अन्दर का एक पर्दा इसे दो हिस्सों में बाँट देने के कारण दो तरफ दो ग्लैण्ड अलग-अलग रहते हैं । | गर्भ में भृण जरायु के अन्दर रहने के समय दोनों अण्डकोष तलपेटके अन्दर दोनों बगल कौड़ी के स्थानके थोड़ा ऊपर पेरिटोनियम ( अन्त्र ढंकनेवाला पर्दा ) के पीछे रहते हैं, बाद में सन्तानके जन्म होने के पहले उक्त दोनों कोष दोनों तरफ नीचे के उदर से उतरते रहते हैं। पहले वे भीतर निम्न उदर के अन्दर कौडीके स्थानपर-इण्टरनल एब्डोमिनल रिंग नामक जो गोलाकार छेद है उसके अन्दर प्रवेश करते हैं, बादमें निम्न उदर के अन्दर ही थोड़े स्थान  में आगे बढ़कर एक्सटर्नल रिंग नामक गोलाकर बाहरी छेद से होकर दोनों तरफ के दोनों स्क्रोटम में अर्थात् चमड़े की थैली के अन्दर उक्त दोनों ग्लैण्ड ( दोनों टेस्टिस ) प्रवेश करते हैं। तलपेट के उक्त एक्सटर्नल रिंग के अर्थात् बाहरी छेद के साथ लगी रस्सी या केचुए की तरहके एक पदार्थ ( इसका अङ्गग्रेजी नाम-स्पर्मेटिक कार्ड है ) की सहायतासे कोष स्क्रोटम अर्थात थैलीके अन्दर झूलते रहते हैं। बहुत बार उक्त कोष एब्डोमिनल रिंग से होकर निकलने के बाद पेटकी चारदीवारी के किसी एक तरफ का छेद वाला रास्ता क्षीण रह जाता है। और उसी छेदवाले रास्ते से अन्त्र ढंकनेवाला पर्दा ( sac ) निकलकर स्क्रोटम के अन्दर आता है, इसी का नाम-इगुइनैल हर्निया या अन्त्र-वृद्धि है। ऊपर जिस रस्सी या केचुए की तरह के पदार्थ के विषय में कहा गया है, उसमें—शिरा, धमनी, लिम्फटिक वेसेल्स, स्नायु, मेम्ब्रेन इत्यादि सब कुछ हैं। दोनों कोषके ऊपरी अंश—जिस अंशमें स्पर्मेटिक कॉर्ड जुड़ा है, उसका अंगरेजी नाम एपिडिडाइमिस ( epididymis ) है । इस एपिडिडाइमिसका प्रदाह होनेपर उसे—एपिडिडाइमिटिस या अर्काइटिस या हिन्दी में एक शिरा कहते हैं ।

 

अण्डकोष के एक तरफ के एपिडिडाइमिस का प्रदाह होने पर उसे–एकशिरा, ऑर्काइटिस या एपिडिडाइमिटिस कहते हैं,  जब अण्डकोषके अन्दरके आवरण ( पर्दा ) में जल या ठीक जल की तरह का पदार्थ इकट्ठा होता है, तब उसे हाइड्रोसिल | कहते हैं , जब जल इकट्ठा न होकर उक्त पर्दे के अन्दर शिरा में रक्त इकट्ठा होता है, शिरा फूल जाती है, तब उसे—वेरिकोसिल (Varicocele) कहते हैं । ऊपरका चमड़ा फूलकर फोड़े की तरह होकर ज्वर, प्रदाह होने पर व उससे रस निकलते रहनेपर उसको–लिम्फ स्क्रोटम कहते हैं । हाइड्रोसिल में ऑकइटिसकी तरह प्रदाह, यन्त्रणा नहीं रहती, कभी थोड़ा दर्द व टन्टनाने का उपसर्ग रहता है, बहुत बार ‘ पहले ऑर्काइटिस होकर बादमें हाइड्रोसिल होता है । अण्डकोष की अधिकांश बीमारियाँ धातुगत दोष से उत्पन्न होती हैं , एकादशी से पूर्णिमा तक यह रोग बढ़ा करता है, फिर घटा करता है | उक्त सभी अण्डकोषकी बीमारियोंमें सस्पेन्सरी बैण्डेजस बाँध रखना अच्छा है, झूले रहने देना ठीक नहीं और हर एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा व रात को सूखा भोजन करना चाहिए ।

 

हाइड्रोसिल (Hydrocele)

अण्डकोषका जो मोटा चमड़ा है, उसमें दो परत हैं (प्लूरा, पेरिटोनियम की तरह), एक का नाम–टियुनिका वैजाइनेलिस व दूसरेका नाम–टियुनिका एल्बुजिनिया है। उक्त दोनों परतों में से स्वाभाविक हालत में सारे सिरस-मेम्ब्रेनकी तरह एक प्रकार का जल-सा पदार्थ निकलकर दोनों परतों को मुलायम व भींगा रखता है, उससे दोनों परत एक साथ सट नहीं जा सकते । किसी कारणवश जब उक्त जल-सा पदार्थ स्वाभाविक की अपेक्षा अधिक परिमाण में निकलता है।  और वह शोषित न होकर दोनों परतों के बीचमें इकट्ठा हुआ रहता है व क्रमशः परिमाणमें बढ़ता ही जाता है, तब हमलोग उसे—हाइड्रोसिल या अण्डकोषमें जल इकट्ठा होना कहते हैं, अंडकोषों की थैली में जल-संचय हो जाने से यह थैली फूल जाती है। यह बीमारी किसी (पुरुष ) को भी हो सकती है इस से बड़ी चिंता में नहीं पड़ जाना चाहिये, इस का कारण ढूंढ कर उसे दूर करना चाहिए। । पानी बहुत अधिक भर जाने पर थैली तरबूज़ जैसी बड़ी हो जाती है।यह एक प्रकारके अण्डकोषका शोथ ( dropsy of the scrotum ) है । नश्तर से पानी निकाल दिया जाता है। यह दो तरह की हो सकती है- (1) जन्म-जात (Congenital) तथा (2) कारण-जात (Acquired) 

 

परीक्षा (Diagnosis)

यह रोग देखने से ही मालूम होता है तथा सभी सहज में ही समझ सकेंगे कि अण्डकोषके साधारण आकार की अपेक्षा यह बहुत बड़ा है, यहाँ तक कि एक नारियल के समान होता है और कभी एक, कभी दोनों कोषके अन्दर जल इकट्ठा होता है । पैलपेशनसे अर्थात् हाथसे दबाकर परीक्षा करनेपर भीतर जल की गति (fluctuation) मालूम होता है । इस रोग में कोष के चमड़े में सूजन रहती है व मोटा हो जाता है। कोरन्द होने पर चमड़ा बहुत मोटा रहेगा और उसके अन्दर उक्त किसी प्रकार के तरल पदार्थ की  गति नहीं मिलेगी।

 

रोग के कारण व लक्षण 

यह रोग वृद्धावस्थामें रक्त फीका पड़ने या जल की तरह ( hydraemia ) होने पर अथवा टियुबर्कुलोसिस में, किसी पुरानी बीमारी के भोगते समय, छातीमें जल इकट्ठा होनेपर, जलोदर में, एकशिरा या यूरेथ्राइटिस आदि बीमारियों के इरिटेशन में और चोट लगने या लात मारने इत्यादि कारणों से होता है। यह कभी निरोग स्वस्थ युवकों और कभी-कभी छोटे बच्चों को भी होता है। हाइड्रोसिल होनेपर—अण्डकोष चिकना, चमकदार व बहुत कड़ा होता है, कोष ( testicle ) दबा व बहुत छोटा होकर अन्त में क्रमशः अदृश्य हो जाता है । अकारण इरिटेशनके फलस्वरूप कोष की वृद्धि हो भी सकती है , अन्दर सिस्ट ( पीब की तरह तरल पदार्थ ) रहने के कारण कोष कड़ा होता है, उक्त संचित तरल पदार्थ थक्का बँधने या रक्त अथवा पीबके कण मिली वस्तु घुलकर जमना व adhesion हो जा सकता है। अण्डकोषके अन्दर की तरल चीजें रंग-विहीन होती हैं, कभी-कभी कुछ पीले रंग की होती हैं । जो हो, इसके साथ क्रमशः पिग्मेण्ट ( रंजक  ), रक्त, फाइब्रिन, चर्बी , म्यूकस, एपिथेलियम ( उपत्वक ), शुक्र इत्यादि के मिलने से हरी आभा, घनी हरी, भूरे रंगकी, कभी लाल रंग की भी होती है।

साधारण हाइड्रोसिल–स्क्रोटम के ऊपरी अंशमें कोष ( testicle ) और नीचे के हिस्सेमें इकट्ठा हुआ तरल पदार्थ रहता है ; किन्तु फिर भी कभी इरिटेशन या प्रदाहके कारण टेस्टिक्ल ( कोष ) स्क्रोटमके साथ जुड़े (adhesion) जाता है, तब कोष नीचे ही अटका रह जाता है और तरल पदार्थ ऊपर इकट्ठा हुआ करता है । .

रोगीकी ऐसी अवस्था में बाहर से बहुत बार स्क्रोटल-हर्नियाके साथ भ्रम हो सकता है, किन्तु परीक्षा करने से हर्निया होने पर-एब्डोमिनल रिंगके अन्दर यन्त्र ( बाँत ) मिलेगा और खाँसने पर अण्डकोष फूल उठेगा लेकिन हाइड्रोसिल मे ऐसा नहीं होगा।

 

Treatment ईलाज 

 

Homeopathic Medicine (होम्योपैथिक दवा )

 

जन्मजात कोष-वृद्धि (Congenital Hydrocele) 

बायोनिया 30 (प्रति 4 घंटे)-अगर पैदाइश में ही कोष-वृद्धि हो तब दो।

ऐब्रोटेनम 30 -बच्चों की कोष-वृद्धि में उपयोगी है ।

 

कारण जात कोष-वृद्धि (Acquired Hydrocele)

आर्निका 30 (प्रति 4 घंटे)-अगर चोट लगने से रोग हुई हो ।

रोडोडेन्ड्रान 30 या 200 दिन में 3 बार  – जब दायें साइड में हो , आंधी तूफान आने के समय रोग बढ़ जाए फिर घट जाए  , रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे कोई कोई जोर से अंडकोष को चूर रहा हो , दर्द पेट तक चला जाता है

पल्साटिला 30 ,200 दिन में 3 बार – जब बाएं तरफ का रोग हो , दर्द तो न हो पर धीरे धीरे रोग बढ़ता जाए

एपिस मेल 30 दिन में 4 बार –सूई चुभने और डंक मारने का-सा दर्द के साथ अंडकोष बढ़ता जाए

ग्रेफ़ाइटिस 30,200 दिन में 3 बार -छोटे बच्चों में अंडकोष तथा अंड में सूजन।

साइलीशिया 1M 2-3 खुराक सप्ताह में 1 बार – लड़कपन के दौरान अंडकोषों में जल-संचय के साथ अगर जनन अंग के आसपास में पसीना और खुजली हो, सिर पर पसीना आये, पतला-दुबला शरीर हो, ठंडी -प्रकृति हो, तब उपयोगी है।

रस टक्स  30 , 200 – जब ठण्ड के कारण या बरसात के मौसम में हुई हो , या ठंड से रोग बढे

 स्पौन्जिया Q, 30, 200 -खासकर बाये तरफ अंडकोष फूलकर कड़ा हो  जाय, लाल रंग का हो जाये, टपक पड़े, जरा सा हिलने डुलने से भी काफी ज्यादा दर्द ।

 

वेरिकोसिल (Varicocele )

इस बीमारीमें स्पर्माटिक-कॉर्ड (शुक्र-रज्जु), एपिडिडाइमिस (अण्डकोष के ऊपर अवस्थित केचुए की तरह की लम्बी वस्तु, यही शुक्र उत्पादक नाड़ी है ) और टेस्टिकल ( कोष ) की शिरायें बढ़ जाती हैं और गाँठ-गाँठ की तरह होकर फूल जाती हैं, अंगुली से देखने पर जैसे केचुए सिकुड़कर एक पिण्ड बनाए हुए हैं ऐसा मालूम होता है। सीधा होकर सोये रहने पर व दबाव डालनेपर यह छोटा हो जाता है और सीधा होकर खड़ा होनेपर फिर बढ़ जाता है । अधिकांश स्थलों में यह रोग बायीं ओर ही अधिक दीख पड़ता है, क्योंकि बायीं ओरका—स्पर्मेटिक कॉर्ड दाहिनी ओर की अपेक्षा अधिक लम्बा और अधिक लिपटा हुआ है । इसके अलावा बायीं ओर सिग्मएड-फ्लेक्सर में अधिक परिमाण में जल इकट्ठा हुआ रहने पर उसके दबाव से भी बायीं ओर आक्रान्त होता है । इस बीमारी में किसी-किसी को बिलकुल तकलीफ नहीं रहती, और कभी-कभी बहुत तकलीफ होती है ; एक प्रकारसे खींचातानी की तरह दर्द कमर से प्रत्यंगों में, यह चलने या खड़े होनेपर और गर्मीके दिनों में अधिक मालूम पड़ता है ।।

मुख्य दवा -हैमामेलिस 30 और आर्निका 30 (दिन में 3 बार )

बेलाडोना  – जब दर्द और सुजन अधिक हो 

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डा राजकुमार (BHMS) होमियोपैथी के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित और काफी अनुभवी डॉक्टर हैं , अपने क्लिनिक के माध्यम से कई वर्षों (लगभग 20 वर्ष) से हर तरह की नये और पुराने तथा जटिल रोंगों के सफल ईलाज करते आ रहे हैं ,यह वेबसाइट किसी भी व्यक्ति के लिए काफी उपयोगी है , कोई भी आदमी इस वेबसाइट से फायदा उठा सकते हैं | अगर कोई भी सवाल या कुछ पूछना चाहते हैं तो बिना कोई संकोच के सम्पर्क कर सकते हैं , email - [email protected]

2 thoughts on “अंडकोष में पानी hydrocele

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      मेरे पिताजी हर्निया से पिडित है उनकी उम्र _ 84 वर्ष है क्या इलाज दिया जाये

      • monsterid

        आपके पिताजी के ईलाज के लिए हमे और भी लक्षणों की जानकारी चाहिए तभी कोई दवा बताई जा सकती है जैसे
        1. हर्निया किस तरफ है ( दाये या बाए तरफ )
        2. दर्द है या नहीं ( अगर है तो कब या किस स्थिति में तकलीफ बढ़ती है )
        3. क्या हर घड़ी बाहर निकला रहता है या सोते समय अंदर हो जाता है इत्यादि
        ये सब जानकारी मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है

        ऐसे हर्निया के ईलाज के दवाओं के जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जाएँ –
        homeotreats.com/hernia

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