Sulphur

सल्फर (गंधक)

Sulphur uses in hindi 

यह एक एंटी सोरिक दवा है। इसकी क्रिया भीतर से बाहर की ओर होती है और यह त्वचा पर मुख्य क्रिया करती है।

स्नायविक प्रकृति वाले व्यक्ति जो जल्दी जल्दी चलते हैँ। जिनकी त्वचा जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैँ।
जलन और खुजली जो बिस्तर के गर्मी से बढ़ जाते हैँ। जल से घृणा, त्वचा कठोर, सूखा, गर्मी लगना मगर नहाने की इच्छा ना करना। शरीर के सब छिद्र का रंग लाल हो जाना। नींद ऐसा होता है की अचानक झट से जाग जाता है. और फिर से सो जाता है। दुबले पतले, कंधे झुके हुए जो झुक कर चलते हैँ या झुक कर बैठते हैँ। शराब पीने वाले व्यक्तियों में अधिक शराब पीने के कारण बीमारी होना। 

मैले कुचैले प्रवृति के रोगी जिनको चर्म रोग होते रहते हैं। खड़ा रहना कष्टदायी हो जाता है। कपाल में गर्मी और जलन बना रहना।
नहाने धोने से दूर भागना, नहाने के बाद रोग बढ़ जाया करते हैँ। बहुत आलस छाया रहना। दिन के समय पैर ठण्डे रहते हैं मगर रात को तलवों में जलन होती है जिसके चलते ठण्डे जगह खोजना. ठंडा करने के लिए विस्तर से बाहर निकाल देता है।

मन

अत्यंत भुलक्क़ड, सोच विचार करना मुश्किल हो जाना। युवकों में बच्चों जैसा चिड़चिड़ापन और गुस्सा। चीथड़ों को सुन्दर वस्तु समझता है संभाल कर रखता है, अपने को धनवान मानता है। हर समय व्यस्त रहना। अत्यंत स्वार्थी। अवसाद ग्रस्त और हर समय चीड़ चिड़ा। खूब भूख, अच्छे खाने पीने के वावजूद दुबले पतले रहना।

त्वचा

शुष्क, पपड़ीदार, थोड़ा सा भी चोट पक जाता है। खुजली होते रहना, जलन होने वाला खुजली, धोने से बढ़ना। गर्मी से चर्म रोग का बढ़ना खासकर विस्तर के गर्मी से। किसी दवा के कारण चर्म रोग का कुछ समय के लिए दब जाना।

सिर और मुँह

माथे में तथा आँखों में जलन और गर्मी, स्कैल्प शुष्क, माथे में खुजली और दाद। खुजलाने से जलन होना। चेहरे में बिना लाली के मुँह के अंदर जलन। सुबह में कड़वा स्वाद। मुँह में फुंसियों में जलन। कंठ सूखा, पहले दायीं ओर फिर बायीं ओर।

आमाशय

भूख या तो खतम या बहुत भूख लगना। खाना काफी नमकीन लगना। पीता अधिक है मगर खाता बहुत कम है। दूध सहन नहीं होना। अत्यधिक अम्ल का बनना, खट्टी डकार। आमाशय के अंदर खालीपन, दुर्बलता। लगभग 11 बजे बहुत कमजोरी और बेहोशी की हालत, कुछ न कुछ खाना पड़ता है।

कब्ज

मल कठोर, गांठदार, दर्दनाक, दर्द के कारण बच्चा मल त्याग से डरता है। काफी सूखा मल ( ब्रायोनिया ).

मलद्वार 

बवासीर, मलद्वार में खुजली और जलन, मलद्वार के चारों ओर लालिमा।

मूत्र

अपने आप मूत्र निकल जाना, बिस्तर पर पेशाब हो जाना। पेशाब लगने पर उसे रोक पाना मुश्किल।

पुरुष

अपने आप वीर्य निकल जाना, बिस्तर पर जाते ही जननांगो में खुजली शुरू हो जाना, जननांग ठण्डे, शक्तिहीन और शिथिल।

बाह्यांग

हाथों में कम्पंन। गरम, हाथ में पसीना चलना। रात के समय हाथों और तलवों में जलन। काँखों से पसीना जिससे लहसुन के तरह गंध आती है।

जब लक्षणों के साथ चुनी हुयी दवा से भी फायदा नहीं हो। जो रोग अच्छी तरह लगभग ठीक हो जाने के बाद फिर से प्रकट हो जाए। कोई पुराना रोग के ईलाज के शुरुआत में इसका प्रयोग करना काफी फायदेमंद है।

रोग वृद्धि

आराम करने के समय, खड़ा होने पर, बिस्तर की गरमी से, नहाने धोने से, सुबह, दोपहर 11 बजे, रात में।

कमी – सूखे, गरम मौसम में

रोग का कारण – रोग लक्षण दब जाने पर, एल्कोहल, धुप, ठण्ड, काफी परिश्रम करने के बाद, ऊंचाई पर पहुंचने पर, गिरने से, मुक्के की चोट से।

पूरक – एलो, सोरिनम, एकोनाइट

तुलना करें – उग्र रोगों में एकोनाइट के बाद अच्छी क्रिया करती है, मर्क, कैल्केरिया सल्फर के बाद लाभदायक है, पहले कभी नहीं प्रयोग करें। लाइकोपोडियम, सीपिया, सर्सापारिल्ला, पल्साटिला।

पोटेंसी– निचे (3x, 6, 30 ) से लेकर उच्च शक्ति(1M, 10M)। पुराने रोगों के ईलाज शुरू करने के लिए 200 या इससे ऊँची शक्ति

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